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सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कà¥à¤¯à¤¾ है - What Is Skin Allergy In Hindi
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के बारे में हम सबने सà¥à¤¨à¤¾ है, लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आप जानते हैं कि इसके होने की कोई à¤à¤• वजह नहीं होती है? कई वजहों से हमारी सà¥à¤•िन में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है और यह चेहरे के अलावा à¤à¥€ शरीर के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ में परेशानी की वजह बन सकती है। सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ उस अवसà¥à¤¥à¤¾ को कहते हैं, जब हमारी तà¥à¤µà¤šà¤¾ इरिटेट या कहें उगà¥à¤° हो जाती है। à¤à¤¸à¤¾ हमारे इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ देने से होता है। इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® यह इशारा करता है कि हमारी सà¥à¤•िन किसी à¤à¤¸à¥€ चीज के संपरà¥à¤• में है, जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठनà¥à¤•सानदेह हो सकता है। परिणाम सà¥à¤µà¤°à¥‚प हमें सà¥à¤•िन में खà¥à¤œà¤²à¥€, रैशेज, जलन आदि महसूस और दिखाई देने लगते हैं। कई बार तो इस वजह से धबà¥à¤¬à¥‡, पितà¥à¤¤à¥€ और तà¥à¤µà¤šà¤¾ में सूजन तक आ जाती है। [1]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के पà¥à¤°à¤•ार- Types Of Skin Allergy In Hindi
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कई पà¥à¤°à¤•ार हैं। इनमें से कà¥à¤› बहà¥à¤¤ कॉमन हैं, जो किसी के लिठà¤à¥€ परेशानी बन सकते हैं। इनके बारे में जानना हम सà¤à¥€ के लिठजरूरी है।
1. à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ (Eczema)
à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ à¤à¤• सामानà¥à¤¯ शबà¥à¤¦ है, जो कई अलग-अलग परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के होने पर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। इसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ में सूजन होती है, तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल और पपड़ीदार हो जाती है और उसमें खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ सà¥à¤•िन में होने वाली à¤à¤• बहà¥à¤¤ कॉमन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है। à¤à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ इसके सबसे आम रूपों में से à¤à¤• है। यह बड़ों से लेकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ तक को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकती है, लेकिन संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• नहीं है यानी à¤à¤• से दूसरे में नहीं फैलती।
2. गà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ à¤à¤¨à¥à¤²à¤¾à¤°à¥‡ (Granuloma Annulare)
गà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ à¤à¤¨à¥à¤²à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है। इसमें सà¥à¤•िन में लाल चकतà¥à¤¤à¥‡ (पपलà¥à¤¸) के साथ गोलाकार आकार के दाने हो जाते हैं। यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और किशोरों यानी यंग अडलà¥à¤Ÿà¥à¤¸ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। उनमें à¤à¥€ लड़कियों में यह à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। इस à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में हाथ-पैरों में छोटे-छोटे गोल दाने हो जाते हैं और उनमें खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। यह कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है, इसके बारे में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पता नहीं चल पाया है, लेकिन इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है।
3. लिचेन पà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¸ (Lichen Planus)
यह 30 से 70 साल तक उमà¥à¤° के यà¥à¤µà¤¾ और बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में होने वाली à¤à¤• सामानà¥à¤¯ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है। इसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ में चमकदार धबà¥à¤¬à¥‡ उà¤à¤° आते हैं। यह à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ शरीर के किसी à¤à¥€ à¤à¤¾à¤— की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में हो सकती है, लेकिन सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कलाई, टखनों, पैर के निचले à¤à¤¾à¤—, पीठऔर गरà¥à¤¦à¤¨ में होती है। कà¥à¤› लोगों के सिर, मà¥à¤‚ह और नाखूनों के अंदर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¥€ यह à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। यह जेनेटिक कारणों से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। मतलब- परिवार में किसी को है, तो आपको à¤à¥€ हो सकती है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¥€ इस à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट से पहले मरीज की हेलà¥à¤¥ हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ और परिवार के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की जानकारी लेते हैं और फिर इलाज शà¥à¤°à¥‚ होता है।
4. पितà¥à¤¤à¥€ और à¤à¤‚जियोà¤à¤¡à¥‡à¤®à¤¾ (Hives and Angioedema)
पितà¥à¤¤à¥€ या हीवà¥à¤¸ à¤à¤• बहà¥à¤¤ कॉमन सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है। इसमें सà¥à¤•िन में लाल उà¤à¤°à¥‡ हà¥à¤ दाने हो जाते हैं, जिनमें बहà¥à¤¤ तेज खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। ये शरीर में कहीं à¤à¥€ दिखाई दे जाती हैं। ये बहà¥à¤¤ ही तेजी से बढ़ती हैं और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में कà¥à¤› दिनों में ही ठीक हो जाती हैं। कई लोगों में पितà¥à¤¤à¥€ की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¥€ होती है। पितà¥à¤¤à¥€ की तरह ही à¤à¤‚जियोà¤à¤¡à¥‡à¤®à¤¾ à¤à¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है। इसमें सà¥à¤•िन में सूजन आ जाती है, जिसका असर तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अंदर तक होता है। आमतौर पर इसमें खà¥à¤œà¤²à¥€ नहीं होती, लेकिन चेहरा, पलकें, होंठ, हाथ, पैर में सूजन आ जाती है। आमतौर पर यह पितà¥à¤¤à¥€ के साथ-साथ ही होती है। पितà¥à¤¤à¥€ किसी à¤à¥€ वजह से हो सकती है। कई बार यह खानपान में गड़बड़ी, किसी दवा की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से à¤à¥€ हो जाती है। बहà¥à¤¤ ठंड, गरà¥à¤®à¥€ या धूप के संपरà¥à¤• में बहà¥à¤¤ देर तक रहने से à¤à¥€ कई लोगों को पितà¥à¤¤à¥€ हो जाती है। [2]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ - Skin Allergy Symptoms In Hindi
आमतौर पर सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ हलà¥à¤•े-फà¥à¤²à¥à¤•े ही होते हैं। कोई à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ पहली बार होती है, तो उसके लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ बहà¥à¤¤ हलà¥à¤•े होते हैं। लेकिन अगर बार-बार à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो रही है, तो कई बार लकà¥à¤·à¤£ गंà¤à¥€à¤° रूप ले लेते हैं। तब डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ इलाज ही à¤à¤•मातà¥à¤° रासà¥à¤¤à¤¾ बच जाता है। सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं।
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
पितà¥à¤¤à¥€ (तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खà¥à¤œà¤²à¥€à¤¦à¤¾à¤° लाल धबà¥à¤¬à¥‡)
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में खà¥à¤œà¤²à¥€ होना
लाल रैशेज
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का लाल हो जाना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में सूजन
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की खाल का निकलना
सà¥à¤•िन में कà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤¸ आना
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का उà¤à¤°à¤¨à¤¾ या उसमें गांठें बनना [3]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण -Skin Allergy Causes In Hindi
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ किन वजहों से होती है यह à¤à¤• बड़ा विषय है, लेकिन कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ वजहें हैं, जिनकी वजह से लोगों में आमतौर पर सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। जूलरी में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाला मेटल और कपड़ों या तà¥à¤µà¤šà¤¾ में लगाठजाने वाली खà¥à¤¶à¤¬à¥‚दार चीजों जैसे- परफà¥à¤¯à¥‚म आदि से सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ आमतौर पर होती है।
निकिल और गोलà¥à¤¡ जूलरी से बहà¥à¤¤ लोगों को सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पसीना निकलने पर जब वह जूलरी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के संपरà¥à¤• में आता है, तब अकà¥à¤¸à¤° सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है।
परफà¥à¤¯à¥‚मà¥à¤¸ और सà¥à¤•िन लोशन में मिलाई जाने वाली खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ (मायà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤²à¥‹à¤¨ परेरा) से à¤à¥€ बहà¥à¤¤ लोगों को सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है।
थिमेरोसॉल à¤à¤• à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• है और कà¥à¤› वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने में à¤à¥€ यह इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है।इसके संपरà¥à¤• में आने से à¤à¥€ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है।
नियोमाइसिन सलà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ à¤à¤• à¤à¤‚टीबायोटिक है, जो पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• उपचार देने वाली कà¥à¤°à¥€à¤®, ऑइंटमेंट, डियोडà¥à¤°à¥‡à¤‚ट, सोपà¥à¤¸, जानवरों के à¤à¥‹à¤œà¤¨ में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है। इससे à¤à¥€ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है।
खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚, कॉसà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚, कीटनाशकों, à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸, साबà¥à¤¨, इतà¥à¤°, और डेंटल उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में पाठजाने वाली खà¥à¤¶à¤¬à¥à¤“ं यानी फà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚स से à¤à¥€ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कई लोगों को हो जाती है।
हेयर डाई बनाने में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाले कोबॉलà¥à¤Ÿ कà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ और शैंपू, नेल पेंट, सनसà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ आदि को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाले ''कà¥à¤µà¤¾à¤Ÿà¤°à¤¨à¤¿à¤¯à¤® 15'' नामक पदारà¥à¤¥ की वजह से à¤à¥€ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है।
इसके अलावा पराग कणों, धूल, किसी कीड़े के काटने से, किसी दवा की वजह से, खास तरह के पेड़-पौधों के संपरà¥à¤• में आने से, कई बार बà¥à¤¯à¥‚टी पà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से, पालतू जानवरों की वजह से à¤à¥€ सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। [4]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के परीकà¥à¤·à¤£- Diagnosis Of Skin Allergy In Hindi
सà¥à¤•िन टेसà¥à¤Ÿ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से लेकर बड़ों तक हर आयॠवरà¥à¤— के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है। हालांकि कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤•िन टेसà¥à¤Ÿ नहीं किठजाता है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे आप खà¥à¤¦ से किसी परीकà¥à¤·à¤£ को करने की कोशिश ना करें। अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पहले सलाह लें। हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤•िन परीकà¥à¤·à¤£ के बारे में बता रहे हैं, जो आमतौर पर किठजाते हैं।
1. सà¥à¤•िन पà¥à¤°à¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग : Skin Prick Testing
यह सबसे कॉमन टेसà¥à¤Ÿ है सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का। इस टेसà¥à¤Ÿ को पीठया बाजू पर किया जाता है, लेकिन अगर पीठया बाजू पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ गई है, तब इस टेसà¥à¤Ÿ को नहीं किया जाता है। इस परीकà¥à¤·à¤£ में बाजू या पीठपर कà¥à¤› लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ डाला जाता है। उस लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बढ़ाने वाला केमिकल होता है। अगर आपको उस केमिकल से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो कà¥à¤› ही देर में सà¥à¤•िन पर उसका असर दिखाई देने लगता है। सà¥à¤•िन लाल हो जाती है और कई लोगों को खà¥à¤œà¤²à¥€ à¤à¥€ होने लगती है। हालांकि कई तरह की दवाइयों से इस टेसà¥à¤Ÿ के रिजलà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं, इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° पहले से मरीज से पूरी हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ जान लेते हैं।
2. बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ : Blood Test
जिन लोगों के सà¥à¤•िन पà¥à¤°à¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿ नहीं किया जाता, उनमें बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ करके à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का परीकà¥à¤·à¤£ किया जाता है। कई मरीजों में सà¥à¤•िन पà¥à¤°à¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿ और बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ दोनों ही किठजाते हैं। इस टेसà¥à¤Ÿ में बà¥à¤²à¤¡ सैंपल को लैब में à¤à¥‡à¤œà¤¾ जाता है और वहां बà¥à¤²à¤¡ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बढ़ाने वाला केमिकल मिलाया जाता है। फिर बà¥à¤²à¤¡ जो à¤à¤‚टीबॉडी बनाता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ देखकर रिजलà¥à¤Ÿ का पता लगाते हैं।
3. पैच टेसà¥à¤Ÿ : Patch test
à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का पता लगाने के लिठइस टेसà¥à¤Ÿ को किया जाता है। इसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर केमिकल लगाया जाता है, जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह बनता है। उसे ढककर तीन-चार दिनों के लिठछोड़ दिया जाता है। उसके बाद मिलने वाले परिणाम को परखा जाता है। [5]
4. लेकिन यह बात धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे
कई बार सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का सटीक पता लगाने के लिठऔर à¤à¥€ कई परीकà¥à¤·à¤£ करने पड़ते हैं। अगर किसी परीकà¥à¤·à¤£ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का पता चलता है, तो उसमें यह पता नहीं चलता कि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कितनी गंà¤à¥€à¤° है। कई बार टेसà¥à¤Ÿ नेगेटिव आता है, लेकिन मरीज को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मरीज अपनी हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ छà¥à¤ªà¤¾ जाता है और कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ दवाइयां ले रहा होता है, जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का पता नहीं लगने देतीं। à¤à¤¸à¥‡ में जरूरी है कि आप अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से कोई à¤à¥€ बात ना छà¥à¤ªà¤¾à¤à¤‚। [6]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का उपचार- Skin Allergy Treatments In Hindi
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ उपचार à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को देखने के बाद तय किया जाता है। à¤à¤¸à¥‡ लोग जिनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• अचà¥à¤›à¥‡ मॉइशà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œà¤° की जरूरत à¤à¥€ होती है।
à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ या पितà¥à¤¤à¥€ : à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कितनी है, उस हिसाब से दवाइयां दी जाती हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° सà¥à¤•िन सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ à¤à¤¸à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में कà¥à¤°à¥€à¤® लगाने की सलाह देते हैं। इसे सीधे तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगाया जाता है। साथ ही कà¥à¤› ओरल टेबलेट à¤à¥€ दी जाती हैं, जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में आराम पहà¥à¤‚चाती हैं।
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ : रिंगवॉरà¥à¤® या अनà¥à¤¯ फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤‚टीफंगल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट किया जाता है। इसमें à¤à¥€ शैंपू और कà¥à¤°à¥€à¤® लगाने के लिठदी जाती है। इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने पर कà¥à¤› टेबलेट दी जाती हैं। जैसे- टरà¥à¤¬à¤¿à¤¨à¤¾à¤«à¤¾à¤‡à¤¨ (Terbinafine) और लैमिसिल (Lamisil) को आमतौर पर यूज किया जाता है।
कीड़े के काटने या डंक मारने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में : कई बार इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ घाव वाली जगह पर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है। तब कीट रेपलेंट का उपयोग किया जाता है और घाव को ढककर रखा जाता है।
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लिठघरेलू उपाय -Home Remedies For Skin Allergy In Hindi
पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, ये होम रेमेडीज सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को ठीक करने के लिठकाम करते हैं।
सेब का सिरका : सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में सेब के सिरके का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² लंबे वकà¥à¤¤ से लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ à¤à¤• घरेलू उपाय है।माना जाता है कि इससे à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ में आराम मिलता है और इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का खतरा कम हो जाता है। à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ à¤à¤• आम सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है और अकेले अमेरिका में 3 करोड़ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लोग इससे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हैं। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दो कप सेब के सिरके को गरà¥à¤® पानी में मिलाकर नहाने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ को नमी मिलती है और वह सà¥à¤®à¥‚थ होती है। कहा जाता है कि सेब का सिरका तà¥à¤µà¤šà¤¾ के à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ लेवल को वापस लाता है। कई लोग विनेगर वाली कà¥à¤°à¥€à¤® à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते हैं, जो सà¥à¤•िन के पीà¤à¤š को सामानà¥à¤¯ बनाती है।
à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ : करीब 6 हजार साल से à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ को घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ों में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा रहा है। इसकी मोटी पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अंदर पानीदार जैल होता है, जिसे कई पà¥à¤°à¤•ार से उपयोग किया जाता है। इसे तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¥€ लगाया जाता है, जो सà¥à¤•िन को मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤®, हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ बनाता है और जखà¥à¤®à¥‹à¤‚-निशानों को à¤à¤°à¤¤à¤¾ है। कई तरह के रैशेज में à¤à¥€ इसे तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगाने की सलाह डॉकà¥à¤Ÿà¤° देते हैं। तीन महीने से ऊपर के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में डाइपर से होने वाले रैशेज में à¤à¥€ à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ जेल को लगाया जा सकता है, लेकिन कई लोगों को इससे à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में किसी à¤à¥€ नà¥à¤¸à¥à¤–े को आजमाने से पहले आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर सलाह लें। इसे लगाना काफी आसान है- à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली जगह पर à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ जैल को लगाà¤à¤‚। यह काफी जलà¥à¤¦à¥€ सूख जाता है। 20 से 25 मिनट बाद सà¥à¤•िन को साफ कर लें या धो लें। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में दिन में दो बार इसे लगाà¤à¤‚। इससे अचà¥à¤›à¥‡ परिणाम मिलते हैं।
बेकिंग सोडा : बेकिंग सोडा तà¥à¤µà¤šà¤¾ के पीà¤à¤š असंतà¥à¤²à¤¨ को ठीक कर सकता है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को à¤à¥€ कम करता है। इसे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना à¤à¥€ बहà¥à¤¤ आसान है। चार टेबलसà¥à¤ªà¥‚न बेकिंग सोडा में 12 चमà¥à¤®à¤š डिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¥à¤¡ पानी या आसà¥à¤¤ जल को मिलाकर पेसà¥à¤Ÿ बना लें। अब इस पेसà¥à¤Ÿ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली जगह पर लगाà¤à¤‚। 10 मिनट बाद ठंडे पानी से तà¥à¤µà¤šà¤¾ को धो लें। उसके बाद à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली जगह पर नारियल का तेल लगाà¤à¤‚। इससे काफी आराम मिलता है।
नारियल का तेल : नारियल तेल कई तरह से हमारी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठगà¥à¤£à¤•ारी है। à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में यह काफी आराम पहà¥à¤‚चाता है। यह ना सिरà¥à¤« à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को कम करता है, बलà¥à¤•ि जलन कम करता है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® बनाता है और इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के खतरे से à¤à¥€ दूर करता है। लेकिन à¤à¤¸à¥‡ लोग जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नारियल से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नारियल तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤ इसे लगाने का सबसे सही समय रात में है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ में धीरे-धीरे समाहित होता है।
पेपरमिंट ऑयल : पेपरमिंट ऑयल ठंडा होता है और पितà¥à¤¤à¥€ में यह खासतौर से फायदा पहà¥à¤‚चाता है। डायबिटीज, लिवर डिजीज और किडनी डिजीज की वजह से होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में à¤à¥€ यह फायदा पहà¥à¤‚चाता है। इसे पेटà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¤® जैली यानी वैसलीन के साथ मिलाकर à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली जगह पर लगाया जा सकता है, लेकिन इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर परामरà¥à¤¶ कर लें।
अनà¥à¤¯ उपाय
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के इलाज के लिये 6 लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• तरीके
अचà¥à¤›à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ वाली मॉइशà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œà¤° कà¥à¤°à¥€à¤® का उपयोग करें। दिनà¤à¤° में कम से कम दो बार उसे लगाà¤à¤‚।
à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ à¤à¤‚टी इचिंग कà¥à¤°à¥€à¤® साथ रखें। बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खà¥à¤œà¤²à¥€ होने पर यह आराम देती हैं। साथ ही हलà¥à¤•े गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करें।
नहाने के दौरान कम केमिकल वाले साबà¥à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। कपड़े धोने के लिठà¤à¥€ हलà¥à¤•े à¤à¤¾à¤— वाला डिटरजेंट लें। परफà¥à¤¯à¥‚म इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² ना करें। à¤à¤¸à¥‡ सà¤à¥€ पà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ ऑनलाइन à¤à¥€ आसानी से मिल जाते हैं।
à¤à¤¸à¥€ चीजें इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से बचें, जिनकी वजह से तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। जैसे- निकिल, जूलरी और ऊनी कपड़े।
सबसे जरूरी चीज जहां à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, खà¥à¤œà¤²à¤¾à¤à¤‚ नहीं। इससे ना सिरà¥à¤« सूजन बढ़ती है, बलà¥à¤•ि तà¥à¤µà¤šà¤¾ को à¤à¥€ नà¥à¤•सान होता है।
अगर कà¥à¤°à¥€à¤® असर ना करें, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बढ़ती जाà¤, तो घरेलू उपायों को छोड़ अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ लें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि समसà¥à¤¯à¤¾ का पूरा समाधान वहीं से हो पाà¤à¤—ा। [7]
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचाव के उपाय -Prevention Of Skin Allergy In Hindi
अगर आप जानते हैं कि किन खास चीजों से आपको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है, तो उनसे दूर रहने की कोशिश करें।यह थोड़ा अजीब तो है, लेकिन कई बार आपको à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचाव मिलता है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से परेशान लोगों को ठंडे पानी से नहाना चाहिà¤à¥¤ नहाने के बाद शरीर को अचà¥à¤›à¥‡ से सूखने देना चाहिठऔर उसके बाद तà¥à¤µà¤šà¤¾ को मॉइशà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œ करना चाहिà¤à¥¤
अगर आप बार-बार à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित होते हैं तो à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ à¤à¤‚टी इचिंग कà¥à¤°à¥€à¤® को साथ में जरूर रखें। बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खà¥à¤œà¤²à¥€ होने पर यह आराम पहà¥à¤‚चाती है।
बहà¥à¤¤ टाइट कपड़े पहनने से बचें। इनकी वजह से रैशेज के चांस बढ़ जाते हैं। ढीले कपड़े पहनें और à¤à¤¸à¤¾ फैबà¥à¤°à¤¿à¤• चà¥à¤¨à¥‡à¤‚, जिससे हवा आर-पार होती हो। जैसे- कॉटन।
सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठ-What To Eat During Skin Allergy In Hindi
कà¥à¤µà¥‡à¤°à¤¸à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤¨ नामक ततà¥à¤µ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को कम करने में मदद करता है। यह पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, मिरà¥à¤š, जामà¥à¤¨ आदि में पाया जाता है।
किवी में à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन-सी पाया जाता है, जो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह बनने वाले हिसà¥à¤Ÿà¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¨ से लड़ता है। किवी की जगह आप संतरे या दूसरे विटामिन से à¤à¤°à¤ªà¥‚र दूसरे खटà¥à¤Ÿà¥‡ फल à¤à¥€ खा सकते हैं।
अनानास यानी पाइनà¤à¤ªà¤² में बà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‡à¤²à¥ˆà¤¨ नामक à¤à¤• à¤à¤‚जाइम होता है। इसका सेवन à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में आराम पहà¥à¤‚चा सकता है।
शहद à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से काफी हद तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखता है। इसका सेवन रोजाना करना चाहिà¤, बशरà¥à¤¤à¥‡ कि शहद सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर मिल जाठऔर शà¥à¤¦à¥à¤§ हो।
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